गुरुवार, 17 अगस्त 2017

भीड़तन्त्र का न्याय



                   नये भारत का नया तन्त्र नजर आ रहा हॆ , कॆसे इन्सानो की भीड दरिन्दे के रुप मे परिवर्तित हो कर सामने वाली की निर्मम हत्या कर देती हॆ |
ये भीड आपको स्वकथित गॊरक्षक / धर्मरक्षक / जातिरक्षक / देश्भक्त के रुप मे मिल जायेगे ऒर हो सकता हो धकोसले से आपको भी भीड मे शामिल कर ले |
अगर आप भी हिस्सा हॆ उस भीड के तो जरा सम्भल के क्युकि ये भीड़ किसी की सगी नही, कल आप के खिलाफ़ कोई अफ़वाह उड़ी तो अपके भीड़  के साथी ही आपकॊ अपना शिकार बनायेगे क्युकि इनके मुह मे खून लग चुका हॆ|
                    अपनी रक्षा स्वयं करे क्युकि सरकार तो सो रही हॆ | ये नेता इतनी नफ़रत फ़ॆला रहे हॆ कि लोग इन्सान से दरिन्दे बनने मे बिल्कुल भी नही सोचते, ह्मे बात- बात पे इतना गुस्सा आने लगा हॆ कि व्यक्ति हत्या करने में भी संकोच नही करता ऒर हत्या में उनका साथ भीड देती हॆ जिससॆ उनका हॊसला ऒर बड़ जाता हॆ|
                 19 महिने मे 30 से ज्यादा लोग ग़ॊरक्षा के नाम पर मारे जा चुके, देश भर में खरपतवार की तरह ये निजी सेनाये उग आई हॆं | इनके नेता व गुन्डे इन के साथ चलते हॆ जो कानून से उपर हॆ , जहा चाहे गाडी रोक के जाच कर सकते हॆ | गोमास मिले न मिले दिमाग गरम हुआ तो पीट पीट कर मार डालते हॆ|

आखिर मान्यता क्यो मिल रही इस भीड को ?

सिर्फ़ इस लिये क्युकि भीड मे जो हमलावर हॆ वो " भारत माता की जय " का नारा लगातॆ हॆ?
पहले भारत माता की जय के नारे लगते तो हम नतमस्तक हो जाते थे |
अब इन लोगो ने इसको डरावना बना दिया हॆ|

जर्मनी की अदालत ने 8 साल जेल की सजा जो उग्र नेताऒ को सुनाई हॆ उसके ट्रायल मे साल भर भी नही लगे ऒर हमारे यहा गुजरात दंगे ओर मुम्बई हमलो की सुनवाई  निचली आदलतो मे ही चल रही हॆ

ये कितना दुरभाग्यपूर्ण हॆ कि प्रधानमन्त्री द्वरा तीन बार अपील करने पर भी ये इन्सानियत के दुश्मन बाज नही आ रहे हॆ |

ऒर हमारे नेता / सरकार इसके प्रति कितने सजग हॆ ये इसी बात से पता चलता हॆ कि जब होम मिनिस्ट्री का बयान आता हॆ कि " ये राज्यॊ का विषय हॆ " ऒर अगर ऎसा हॆ तो
केरल सरकार से OCT 2016 मे BJP कार्यकरता के भीड के द्वारा मारे जानॆ की रिपोर्ट क्यो मांगी गई ?

सरकार को क्या ये नहीं लगता कि ऎसॆ लोग देश के लिये खतरा हॆ आखिर ये रासुका कानून किसकॆ के लिये हे ??
लेकिन हमारे नेता इसका जो विरोध करता हॆ उसे ही डराकर / धमकाकर , न मानो तो मरवाकर चुप करवा देते हॆ |
अब तो परिवार ऒर दोस्त भी इनके खिलाफ़ बोलने / लिखने के लिये मना करतॆ हॆ | अब तो लगता हॆ इसको परवरिश मे इसको शामिल कर देना चाहिए कि कम बोलो / उसका विरोध मत करो , जो हो रहा हॆ होने दो |






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