खाना खा के न्यूज़ चैनल देखने बैठा तो देखा कि माननीय प्रधानमंत्री जी देश के नाम सन्देश देने वाले हैं , और भारतीय मीडिया (अरे वही जो सबसे तेज है ,नम्बर एक है,और आपको आगे रखती है ) बता रहा था कि आज मोदी जी , रक्षा सलाहकार और सेना अध्यक्ष आदि-आदि से मिले हैं और पकिस्तान के सम्बद्ध में कुछ होने वाला हैं , लेकिन सारी तेजी धीरे पड़ गई। मोदी जी ने अपनी सन्देश में जब बोला कि "आज रात से 500 और 1000 के नोट बंद हो रहे हैं और ये आधी रात से महज कागज के टुकडे रह जाएंगे। "
मुझे बहुत ख़ुशी हुई और मैंने अपनी ख़ुशी फेसबुक पर जाहिर भी की , उन्होंने अपनी सन्देश में यह भी कहा की 500 और 2000 के नए नोट भी आएंगे। 2000 के नोट लाने की क्या जरुरत थी ?? ये नही समझ आया ,??
क्योंकि 2000 के नोट से घूस लेने देने में आसानी ही होगी।
खैर मैंने अपने पर्स में देखा तो 500 के दो नोट पड़े हुए थे , मैं उन्हॆ बदलवाने के लिए जल्दी से निकल पड़ा लेकिन संचार क्रांति के युग में यह बात आग की तरह फ़ैल गई कि ये नोट नही महज कागज का टुकड़ा है कोई भी नोट लेने को तैयार नही था। देर रात तक किसी तरह नोट एक दूकान से बदलवा लिया ,मेरी तरह बहुत लोग इसी जुगाड़ में थे।
चारो ओर मोदी जी के इस कदम की बात चल रही है, हर घर में , सड़को पर , चौराहो पर, हर कोई अपने ज्ञान के हिसाब से इस फैसले का आकलन कर रहा था। अगले दिन सुबह बैंको के सामने मानव हुजूम उमड़ पड़ा , हर कोई अपने सारे नोट आज ही बदल लेना या जमा कर देना चाहता था। लोगों को दिक्कत भी थी फिर भी वो फैसले के साथ थे।
अफवाहों का बाजार भी गर्म था कि दो हज़ार के नोट में NANO GPS CHIP है। एक दो न्यूज़ चैनल ने तो खबर भी चला दी थी लेकिन सब अफवाह ही था।
प्रधानमंत्री जी ने देश से 50 दिन का समय माँगा। 50 दिन तो धीरे धीरे ख़त्म होते जा रहे थे लेकिन लोगों की समस्या नही। रोज रोज नए नए नियम थोपे जा रहे, खुद नेताओ को भी नही पता की आज कौन सा वाला नियम चल रहा है??
विरोधी दल इसे घोटाला बता रहे तो कोई आरोप लगा रहा कि सत्ताधारी पार्टी के बडे नेताओ और करीबी व्यापारी मित्रो को इसके बारे में पहले से खबर थी और वे अपना पैसा पहले ही बदलवा लिए हैं.
और यहाँ लाइन में लगी आम जनता में कइयो की मौत भी गई। देश इतना कुछ सहते हुए भी लाइन में लगा रहा। कई जगह लोगों का सब्र टूट भी रहा था।
और हमारी मीडिया केवल शहरों की समस्या दिखा रहा था वह तो गांव तक पहुच भी नही रहा है।
सोचिये आप कि जिस गांव से बैंक 10 से 15 किमी के दुरी पर है उनका क्या हाल होगा।
किसान ,मजदूर, अपना सारा काम छोड़ कर बैंक की लाइन में लगा हुआ है।
ग्रामीण इलाके तक तो पैसा पहुच भी नही पा रहा है।
नोटबंदी का असर आम जनता पर तो दिखता है लेकिन राजनेताओ पर नही। नेताओ का चुनावी प्रचार प्रसार उसी तेजी से चल रहा है जैसा की पहले चलता था।
कोई रथ यात्रा निकाल रहा है तो कोई परिवर्तन यात्रा निकाल रहा है , बड़े बड़े मंच सज रहे हैं। इन चुनावी कार्यक्रमो की चमक देख कर ही आप अंदाजा लगा सकते है कि इन पर कितना असर पड़ा है। हेलीकाप्टर उसी तरह गरजते हुए उड़ रहे हैं।
पचास दिन पूरे हो गए और लोग अभी भी लाइन में लग कर नई सुबह का इन्तजार कर रहे हैं। शायद ही कोई यह पचास दिन कभी भूले।
अगर नेता सच में काले धन और भ्रस्टाचार के खिलाफ है तो उन्हें अपनी अपनी पार्टियो के चंदे का सोर्स जनता को बताये और भविष्य में चन्दा कैश में ना लेकर ,चेक या अन्य माध्यम से लेंगे ये सुनिश्चित करे।
विदेशो में जमा काले धन वालों के नाम का खुलाशा करे जिससे जनता उन गद्दारो को जान सके और जनता को हक़ भी है।
सभी पार्टिया RTI को अपने ऊपर लागू करे। लोकपाल की नियुक्ति जल्द से जल्द करें।
अगर पार्टिया ऐसा नही करती हैं तो आप समझदार हो , ये जनतंत्र है और यहाँ जनता का फैसला ही सर्वमान्य है।
जय हिन्द।
Nice ..
जवाब देंहटाएंNice
जवाब देंहटाएंGood work
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